programme

हिंदी का आधुनिक कथा-साहित्य

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Course TypeCourse CodeNo. Of Credits
Foundation CoreNA4

Semester and Year Offered: WS 2021

Course Coordinator and Team: Hindi Faculty

Email of course coordinator:  

Pre-requisites: None

1. Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD?

NONE

2. Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course:

(Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify)

NONE

3. No. of students to be admitted (with justification if lower than usual cohort size is proposed):

AS PER SCHOOL RULES

4. Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify):

SEMESTER

5. How does the course link with the vision of AUD?

इसकोर्समेंहिंदी कथा साहित्य के जन्म की ऐतिहासिक-सामाजिक परिस्थितियों, विकास-यात्रा, प्रमुख प्रवृत्तियों, विचारधाराओं, कथा-शिल्प आदि से विद्यार्थियों को परिचित कराया जाएगा ताकि वे समाज के विभिन्न पक्षों व आधुनिक समाज की जटिलताओं के प्रति संवेदनशील हो सकें। पाठ्यक्रम में सम्मिलित साहित्यिक कृतियों का उद्देश्य समाज में मामूली, साधारण, संघर्षशील चीजों के साथ साहित्य के संबंध को प्रकट करना होगा ताकि न्यायपूर्ण, आधुनिक व भेदभावहीन समाज की स्थापना के लिए चल रहे प्रयासों के प्रति गंभीरता को सुनिश्चित शिक्षण पद्धति के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा सके।

6. How does the course link with the specific programme(s) where it is being offered?

यह कोर्सहिंदी विषय में स्नातकोत्तर स्तर के अध्यापन तथा स्कूल आफ लेटर्स (SOL) की अंतर्भाषी, अंतरानुशासनिक तथा तुलनात्मक साहित्यिक पद्धति के अनुरूप है। इसमें कथा साहित्य के माध्यम से हिंदी समाज की सामाजिक-ऐतिहासिक बनावट, अस्मितागत समस्याएं, राष्ट्रीय संकट को समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया जा सकेगा। हिंदी कथा-साहित्य में किस प्रकार हाशिए के वर्गों की अभिव्यक्ति हुई है, इसके बारे में विद्यार्थियों को सजग किया जाएगा। साहित्य में जनजीवन की अभिव्यक्ति व उसकी ऐतिहासिकता के विषय में शिक्षण किया जा सकेगा।

Course Details:

a. Summary:

इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को आधुनिक हिंदी कथा साहित्य के दो प्रमुख रूपों यानी आधुनिक कहानी और आधुनिक उपन्यासों से परिचित कराया जाएगा। भारत में आधुनिकता का आगमन बेहद जटिल परिस्थितियों में बहुस्तरीय प्रक्रियाओं के मध्य हुआ था तथा कथा-साहित्य में उसकी विविध रूपों में अभिव्यक्तियां हुई थीं। साहित्य में आधुनिकता का आधार उपनिवेशवाद विरोधी संघर्षों, सामंतवाद का विरोध, जातिगत भेदभाव का खंडन, साधारण मनुष्य की स्थापना तथा गद्य के सामाजिक सरोकारों से जुड़ा हुआ है। गांव के साधारण किसान, नौजवान,बच्चे-बूढ़े, क्रांतिकारी, समाज-सुधारक, स्त्रियां, शिक्षक, नौकरीपेशा, कारीगर व मजदूर आदि समाज के सभी वर्गों की कथाएं हमारे साहित्य में हैं। उनमें अपने पाठक की कल्पनाशीलता तथा संवेदनशीलता को भव्यतम ऊंचाइयों पर पहुंचाने की अपार क्षमता है। आधुनिक कथा-साहित्य का पाठ्यक्रम विभिन्न वर्गों की जीवन संबंधी चुनौतियों, संघर्षों, पराजयों व जीवट उत्साहो के विस्तृत संसार के प्रति जिज्ञासु बनाएगा। उन्हें कालक्रम के अनुसार कथा व उपन्यास के बदलते सरोकारों तथा बदलते ढांचे से अवगत कराएगा। विगत सदी का कथा-साहित्य मुक्ति संघर्षों, समाजवादी विचारधारा के प्रसार तथा लोकतांत्रिक चेतना के विस्तार से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। नाना प्रकार के पाखंड, विद्रूप, ढोंग व नैतिक गिरावट की कथाएं भी इसमें उपस्थित हैं। खासतौर पर स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र निर्माण की समस्याओं तथा मोहभंग की कथा-साहित्य में जो अभिव्यक्तियां हुई हैं, उसे प्रमुखता प्रदान की जाएगी। समाज के प्रति लेखकों के दृष्टिकोण में बदलाव आया और साथ ही लेखक होने की कसौटी में भी परिवर्तन दर्ज किया गया। इस तथ्य को कथा साहित्य के केंद्र में रखकर व्याख्यायित किया जाएगा। हिंदी के प्रमुख लेखकों जैसे चंद्रधर शर्मा गुलेरी, जयशंकर प्रसाद, बंग महिला, प्रेमचंद, जैनेंद्र, अज्ञेय, यशपाल, फणीश्वरनाथ रेणु, मोहन राकेश, कमलेश्वर, निर्मल वर्मा, श्रीलाल शुक्ल, अमरकांत, भीष्म साहनी, ऊषा प्रियंवदा, मन्नू भंडारी तथा उदयप्रकाश की प्रतिनिधि कहानियों को इसके लिए आधार बनाया जाएगा।

b. Objectives:

यह कोर्स विद्यार्थियोंकोसाहित्यिकपाठोंकेज़रिएसामाजिकयथार्थकाविश्लेषणकरनेमेंसक्षमबनाएगा तथाभारतीय समाज की बहुलता, विविधता, गांव-शहर के फर्क, शहरीकरण की जटिलता आदि से विद्यार्थियों को अवगत कराने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका को अदा करेगा।इसके माध्यम से हिंदीके गद्य के विभिन्न रूपों, परिवेशगत आयामों, स्थानीय लक्षणों की सघन पड़ताल करने में विद्यार्थी सक्षम हो सकेगा। गद्य साहित्य के अध्ययन के माध्यम सेविद्यार्थियोंकी रचनात्मक क्षमता, कल्पनाशीलता आदि का विकास करना भी इस कोर्स का प्रधान उद्देश्य रहेगा।कथा साहित्य को जेंडर, स्त्री-प्रश्नों, अस्मितावादी नजरियों, राष्ट्र निर्माण के सवालों तथा विचारधारात्मक दृष्टियों से परखने के लिए भीविद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जा सकेगा।

c. Expected learning outcomes:

इस कोर्स के माध्यम से विद्यार्थी आधुनिक कथा साहित्य के इतिहास का आलोचनात्मक अध्ययन कर आधुनिक साहित्य की विकास यात्रा के प्रमुख पहलुओं का ज्ञान प्राप्त करेंगे। वे समाज के विविध घटकों, वर्गों, अस्मिताओं, सामाजिक स्तरों आदि के प्रति व्यापक संवेदनशील नजरिया ही नहीं विकसित करेंगे बल्कि वे अपने आगामी शोध व लेखन में इस ज्ञान का प्रयोग कर हिंदी के शोध-परिदृश्य को समृद्ध करने का कार्य करेंगे। वे ज्ञान, तर्क, वैचारिकी तथा साहित्य के अंतर्संबंधों पर विवेकवादी तरीके से सोचने के लिए स्वयं को तैयार कर सकेंगे।

d. Overall structure (course organisation, rationale of organisation; outline of each module):

माड्यूल 1: हिंदी कथा- साहित्य का परिचय

पाठ्यक्रम का यह आरंभिक खंड आधुनिक हिंदी कथा साहित्य का विस्तृत परिचय प्रदान करेगा। हिंदी में उपन्यास व कहानी के उदय, उसकी विशेषताओं के क्रमिक विकास व प्रमुख लेखकों व उनकी कृतियों का सर्वेक्षणी परिचय देगा। हिंदी साहित्य का विकास औपनिवेशिक स्थितियों, राष्ट्रवादी आंदोलनों, समाज सुधार की चेतना तथा नए मध्यवर्ग के उदय से प्रभावित रहा है।व्यवस्थित लेखन, फुटकर लेखन व छापामार आदि किस्म के लेखन ने कथासाहित्य की नींव रखने का काम किया है। इस खंड में 19वीं सदी के उत्तरार्ध में उत्पन्न परिस्थितियों के आलोक में हिंदी कथा साहित्य के विकास की रूपरेखा से विद्यार्थियों को परिचित कराया जाएगा और साथ ही बीसवीं सदी के विभिन्न चरणों में इस कथा साहित्य की परिवर्तनशील प्रवृत्तियों व विशेषताओं की जानकारी भी प्रदान की जाएगी ताकि वे अगले माड्यूल में, जिसमें हिंदी उपन्यास व हिंदी कहानी का पाठगत अध्ययन होना है, उसे विस्तृत ऐतिहासिक दृष्टिकोण से समझने के लिए स्वयं को तैयार कर सकें। कथासाहित्य की विभिन्न शैलियों खासतौर पर सुधारवादी, रोमांटिक, ऐतिहासिक, राष्ट्रीयता से सबंधित, यथार्थवादी, तिलस्म-फंतासीनुमा, उत्तर आधुनिक व जादुई यथार्थवाद को केंद्र में रखकर भी कथासाहित्य की विभिन्न प्रवृत्तियों का अध्ययन होगा। नवीन कथासाहित्य ने किस प्रकार से नए स्त्री-पुरुष की कल्पना, नई स्त्री की अवधारणा, नए समाज की परिकल्पना व इतिहास-अतीत से संबंधो को विकसित किया, इसका भी परिचय प्रदान किया जाएगा।

  • हिंदी उपन्यास के उदय की ऐतिहासिक परिस्थितियां और उसका विकास
  • हिंदी कहानी के उदय की ऐतिहासिक परिस्थितियां और उसका विकास

संदर्भ पुस्तकें

  • उपन्यास का उदय- आयन वाट, हरियाणा साहित्य अकादमी, 1990
  • हिंदी साहित्य का इतिहास- रामचंद्र शुक्ल, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद, 2004
  • मर्चेंट टेल्स एंड द इमरजेंस आफ द नावेल इन हिंदी- वसुधा डालमिया, इकानमिक एंड पालिटिकल वीकली, 43.3-49-60
  • हिंदी उपन्यास का विकास- मधुरेश, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली, 2014
  • हिंदी कहानी का इतिहासः गोपाल राय, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली, 2008
  • हिंदी कहानी का विकासः मधुरेश, राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली, 2003
  • हिंदी की आरंभिक कहानिया- गंगाप्रसाद विमल (चयन व भूमिका), नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली, 2014

माड्यूल2: हिंदी उपन्यास

यहमाड्यूलहिंदी के प्रधान उपन्यासों केगहनविश्लेषण, विवेचन आदि को संभव बनाने पर आधारित होगा। इन उपन्यासों के सघन पाठ के माध्यम से हिंदी उपन्यास में ग्रामीण जीवन की अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता आंदोलन के प्रभाव, व्यक्तिवाद के विकास, सामाजिक समस्याओं की अभिव्यक्ति आदि की दिशा में शिक्षण कार्य को संपन्न किया जा सकेगा।छात्रोंकेभीतरसाहित्यिकसंवेदनशीलता को उत्पन्न करते हुए उन्हें उत्तर भारत के समाज की ऐतिहासिकता, घटनाओं-दुर्घटनाओं, हलचलों, उथलपुथल व जड़ताओं से जुड़े विविध प्रश्नों से जोड़ा जा सकेगा। उपन्यासों का एक बड़ा काम जीवन को महाकाव्यात्मक रूप से प्रस्तुत करना रहा है जिसमें चरित्र किसी विराट यथार्थ की अनुगूंज होते हैं। इसलिए उपन्यासों का पाठ जीवन की सूक्ष्म सचाइयों के साथ-साथ उसकी विशालता की दिशा में भी विद्यार्थियों को सोचने, समझने तथा बहस में शामिल होने के लिए प्रवृत्त करेगा। आधुनिक समाज में जाति, जेंडर, वर्ग व क्षेत्र के सवालों पर संवेदनशीलता को दर्ज किया जा सकता है। साहित्यिक कृतियों के अस्मितावादी, हाशिए की वैचारिकी पर आधारित तथा पर्यावरण के दृष्टिकोण से आधारित पाठों पर विशेष बल दिया जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए उपन्यासों की कथा को किसी निश्चित व्याख्या या दृष्टिकोण के अधीन रखने के स्थान पर उन्हें विभिन्न किस्म की संवादी बहसों तथा विमर्श के लिए खोला जाएगा। उपन्यासों के अध्ययन में पाठगत अर्थों की बहुलता से विद्यार्थी को परिचित कराने पर भी विशेष ध्यान रखा जाएगा और वर्तमान सामाजिक परिवेश में उन कथाओं, चरित्रो, शिल्प की प्रासंगिकता को उभारा जा सकेगा। इसमें कुल मिलाकर दस उपन्यास प्रस्तावित किए जा रहे हैं जिनमें शिक्षक व विद्यार्थियों के बीच सहमति से 4 उपन्यासों का चयन किया जाएगा। विभिन्न सत्रों में उपन्यासों की दी गई सूची में से अलग उपन्यास चुनकर उन्हें शिक्षण कार्य के लिए उपयोग किया जाएगा। हिंदी में उपन्यासों की सुधारवादी, आदर्शवादी, मनोविश्लेषणात्मक, यथार्थवादी, ऐतिहासिक उपन्यास, रोमांटिक उपन्यास, आंचलिक उपन्यास की पारंपरिक श्रेणियां रही हैं। इन श्रेणियों की ऐतिहासिकता से अवगत कराते हुए उपन्यास आलोचना के नए सिद्धांतों विशेषकर अस्मितावादी सिद्धांतों, उत्तर औपनिवेशिक सिद्धांतों, विखंडनवादी सिद्धांत, समाजशास्त्रीय पद्धित का भी उपन्यास के विवेचन-विश्लेषण में प्रयोग किया जाएगा।

निर्धारितपाठ:

(खंड-क)

  • रंगभूमि (प्रेमचंद)
  • त्यागपत्र (जैनेंद्र)
  • शेखरः एक जीवनी, भाग-1 (अज्ञेय)
  • बाणभट्ट की आत्मकथा (हजारी प्रसाद द्विवेदी)

(खंड-ख)

  • झूठा-सच, भाग-1 (यशपाल)
  • तमस (भीष्म साहनी)
  • राग दरबारी (श्रीलाल शुक्ल)

(खंड-ग)

  • मैला आंचल (फणीश्वरनाथ रेणु)
  • मित्रो मरजानी (कृष्णा सोबती)
  • महाभोज (मन्नू भंडारी)

संदर्भ पुस्तकें

  • कसौटी पत्रिका का उपन्यास अंक- नंदकिशोर नवल (संपा)
  • आधुनिक हिंदी उपन्यास( दो खंड)- संपा- भीष्म साहनी, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2010
  • हिंदी उपन्यास का इतिहास- गोपाल राय, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2000
  • उपन्यास और लोकजीवन- राल्फ फाक्स, पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली, 1957
  • प्रेमचंद और उनका युगः रामविलास शर्मा, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2001
  • रागदरबारीः आलोचना की फांस- रेखा अवस्थी, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2014
  • अठारह उपन्यासः राजेंद्र यादव, राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली, 1999
  • उपन्यास और लोकतंत्र- मैनेजर पांडे, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 2011

माड्यूल3: हिंदी की आधुनिक कहानियां

इसमाड्यूलमेंशामिल कहानियोंकेअध्ययनसे बीसवीं सदी की मनुष्यता के समक्ष उत्पन्न सामाजिक-सांस्कृतिक उलझनों व चुनौतियों तथा उसके औदात्य व निकृष्टताओं के विभिन्न पहलुओं का अंतर्दृष्टिपूर्ण मूल्यांकन व समीक्षा संभव हो सकेगी। आधुनिक कहानी ने भारत जैसे कथाप्रधान देश में नई अंतर्वस्तु, शिल्प व भाषा के स्तर पर किस प्रकार के नए प्रयोग किए तथा वे प्रयोग आधुनिकता के प्रोजेक्ट का किस प्रकार अनिवार्य हिस्सा बन रहे थे, इसका विवेचन व विश्लेषण किया जा सकेगा। समाज ने किस प्रकार से राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न त्रासदियों का सामना किया तथा परंपरा से किस प्रकार समाज की बहुपक्षीय मुठभेड़ हो रही थी, इन कहानियों के माध्यम से इसका प्रामाणिक बोध अर्जित किया जा सकेगा।विभिन्न किस्म के घरेलू परिवेश, संस्कृतियां, दिनचर्याएं, आर्थिक मुश्किलें, सम्मान-अपमान के प्रश्न, रोमांटिक भावबोध, जातपांत के स्थानीय तनाव, स्त्रीपक्ष इन कथाओं में उपस्थित हैं और कथाओं के पाठ से भारत के सांस्कृतिक-सामाजिक जीवन के विश्वसनीय चित्र उभरकर सामने आएंगे। उपन्यासों के अध्ययन के भांति कहानियों में भी लैंगिक वर्चस्व, जातिगत तनावों, राष्ट्रीयता के संकट तथा वर्गीय विभाजनों की कसौटी पर इन कहानियों का आलोचनात्मक पाठ तैयार किया जा सकेगा। एक ओर समाज में परंपरा जैसी चीज से होने वाले द्वंद्व तथा दूसरी ओर आधुनिकता से विभिन्न किस्म के द्वंद्वों की संवादधर्मी पड़ताल की ओर विद्यार्थियों को उन्मुख किया जा सकेगा।

निर्धारितपाठ:

  • उसने कहा था (चंद्रधर शर्मा गुलेरी)
  • गुंडा (जयशंकर प्रसाद)
  • चंद्रदेव से मेरी बातें (राजेंद्र बाला घोष -‘बंग महिला’)
  • कफन (प्रेमचंद)
  • एक रात (जैनेंद्र)
  • पर्दा (यशपाल)
  • रोज (अज्ञेय)
  • वापसी (ऊषा प्रियंवदा)
  • अमृतसर आ गया है (भीष्म साहनी)
  • परिंदे (निर्मल वर्मा)
  • मलबे का मालिक (मोहन राकेश)
  • कोसी का घटवार (शेखर जोशी)
  • हंसा जाई अकेला (मार्कंर्डेय)
  • राजा निरबंसिया (कमलेश्वर)
  • जिंदगी और जोंक (अमरकांत)
  • तीसरी कसम (फणीश्वरनाथ रेणु)
  • विकलांग श्रद्धा का दौर (हरिशंकर परसाई)
  • पिता (ज्ञानरंजन)
  • घुसपैठिए (ओमप्रकाश वाल्मीकि)
  • मोहनदास (उदयप्रकाश)

संदर्भ पुस्तकें

  • कहानी, नई कहानी, नामवर सिंह, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2004
  • एक दुनिया समानांतर- राजेंद्र यादव, राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली, 2003
  • हिंदी कहानी का विकासः मधुरेश, राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली, 2003
  • हिंदी कहानी का इतिहासः गोपाल राय, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2008
  • नई कहानी की भूमिकाः कमलेश्वर, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2015
  • नई कहानीः संदर्भ और प्रकृति- देवीशंकर अवस्थी, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2018

सहायक पुस्तकें :

  • हिंदी साहित्य का इतिहासः रामचंद्र शुक्ल, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद, 2004
  • कहानी, समकालीन चुनौतियाः शंभू गुप्त, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 2014
  • अठारह उपन्यासः राजेंद्र यादव, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2008
  • हिंदी उपन्यास का विकासः मधुरेश, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद, 2014
  • हिंदी उपन्यासः एक अंतर्यात्रा- रामदरश मिश्र, राजकमल प्रकाशन दिल्ली/पटना, 1982
  • साहित्य के समाजशास्त्र की भूमिका- मैनेजर पांडे, हरियाणा साहित्य अकादमी, पंचकूला, 2006
  • कहानीकार प्रेमचंदः रचनादृष्टि और शिल्प- शिवकुमार मिश्र, लोकभारती प्रकाशन, 2010
  • यथार्थवाद- शिवकुमार मिश्र, द मैकमिलन कंपनी आफ इंडिया, दिल्ली, 1983
  • हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास- बच्चन सिंह, राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली, 2018
  • हिंदी का लोकवृत्त (1920-40)- फ्रेंचिस्का आर्सीनी, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 2010
  • हिंदी कहानीः एक नई दृष्टि- इंद्रनाथ मदान, संभावना प्रकाशन, हापुड़, 1978
  • समकालीन कहानीः युगबोध का संदर्भः पुष्पपाल सिंह, नेशनल पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली, 1986
  • द थ्योरी आप नावेल- जार्ज लुकाच, आकार बुक्स, नई दिल्ली, 2016
  • द हिस्टारिकल नावेल- जार्ज लुकाच, युनिवर्सिटी आफ नेबरास्का प्रेस, 1983
  • रियलिज्म इन ट्वेंटीथ सेंचुरी नावेल, कोलोनियल डिफरेंस एंड़ लिटरेरी फार्म- उलका अंजारिया, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, कैंब्रिज, 2012
  • मार्क्सिज्म एंड फार्मः ट्वेंटीथ सेंचुरी डाइलेक्टिकल थ्योरी आफ लिटरेचर- फ्रेडरिख जेमसन, प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी प्रेस, प्रिंस्टन, 1971
  • मार्क्सिज्म एंड लिटरेरी क्रिटिसिज्म- टेरी ईगलटन, यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया प्रेस, कैलीफोर्निया, 1999

Contents (week wise plan with readings):

 

Week

Plan/ Theme/ Topic

Objectives

Core Reading (with no. of pages)

Additional Suggested Readings

Assessment (weights, modes, scheduling)

1

 

हिंदी उपन्यास के उदय का इतिहास

साहित्य शिक्षण

उपन्यास का उदय- आयन वाटहिंदी उपन्यास का इतिहास- गोपाल राय, हिंदी साहित्य का इतिहास- रामचंद्र शुक्ल

 

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2

आधुनिक हिंदी कहानी का परिचय

साहित्य शिक्षण

हिंदी कहानी का विकासः मधुरेश, हिंदी कहानी का इतिहासः गोपाल राय

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3

 

हिंदी उपन्यास-

 

साहित्य शिक्षण

निर्धारित पाठ

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4

हिंदी उपन्यास-

साहित्य शिक्षण

निर्धारित पाठ

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20 percent (after 4 week)- Home Assignment

5

हिंदी उपन्यास-

साहित्य शिक्षण

निर्धारित पाठ

-----------

 

6

हिंदी उपन्यास-

साहित्य शिक्षण

निर्धारित पाठ

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7

हिंदी कहानी- निर्धारित पाठ से

साहित्य शिक्षण

निर्धारित कहानियां

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8

हिंदी कहानी- निर्धारित पाठ से

साहित्य शिक्षण

निर्धारित कहानियां

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40percent (After 4 week)- Mid Sem

9

हिंदी कहानी- निर्धारित पाठ से

साहित्य शिक्षण

निर्धारित कहानियां

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10

हिंदी कहानी- निर्धारित पाठ से

साहित्य शिक्षण

निर्धारित कहानियां

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11

हिंदी कहानी- निर्धारित पाठ से

साहित्य प्रशिक्षण

निर्धारित कहानियां

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12

हिंदी कहानी- निर्धारित पाठ से

साहित्य प्रशिक्षण

निर्धारित कहानियां

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40 per cent (after 4 week)- End Sem

Pedagogy:

Instructional strategies:

माड्यूल्समेंशामिलपाठोंकाअध्यापनकरतेहुएइसरचनाओंसेजुड़ेहुएआनुषांगिकप्रसंगोंसेविद्यार्थियोंकोपरिचितकरानेकेलिएकक्षामेंपाठकेविश्लेषणकेअतिरिक्तबहस-मुबाहिसाभीसंचालितकियाजाएगा।इनपाठोंकीअंतरअनुशासनिकताकोध्यानमेंरखतेहुएविश्वविद्यालयमेंउपलब्धयाबाहरकेविद्वानोंकेअतिथिव्याख्यानभीकराएजानेअपेक्षितहोंगे। साहित्यिक कृतियों का संबंध फिल्मों, राजनीति, राष्ट्रीय स्तर की बहसों, कलाओं आदि से भी रहा है और पाठ्यक्रम में सम्मिलित कृतियों को केंद्र में रखकर उसके व्यापक आयामों को भी शिक्षण का अंग बनाया जाएगा।विशिष्टविद्वानोंको विशेष तौर पर आमंत्रित करकार्यशालाएँ आयोजित करना, फिल्म स्क्रीनिंग, साहित्यिक यात्राओं से उनके भौगोलिक पक्षों का अवलोकन करना आदि भी शिक्षण प्रक्रिया की सततमान प्रविधियां होंगी।

Special needs (facilities, requirements in terms of software, studio, lab, clinic, library, classroom/others instructional space; any other – please specify):

NONE

Expertise in AUD faculty or outside

AUD FACUTY

Linkages with external agencies (e.g., with field-based organizations, hospital; any others)

NONE

Signature of Course Coordinator(s)

Note:

  • Modifications on the basis of deliberations in the Board of Studies (or Research Studies Committee in the case of research programmes) and the relevant Standing Committee (SCAP/SCPVCE/SCR) shall be incorporated and the revised proposal should be submitted to the Academic Council with due recommendations.
  • Core courses which are meant to be part of more than one programme, and are to be shared across Schools, may need to be taken through the Boards of Studies of the respective Schools. The electives shared between more than one programme should have been approved in the Board of Studies of and taken through the SCAP/SCPVCE/SCR of the primary School.
  • In certain special cases, where a course does not belong to any particular School, the proposal may be submitted through SCAP/SCPVCE/SCR to the Academic Council.

Recommendation of the School of Studies:

 

Suggestions:

Signature of the Dean of the School