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छायावादोत्तfर हिंदी कविता

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Course TypeCourse CodeNo. Of Credits
Foundation CoreNA6
  • Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? None
  • Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course:
  • (Pre-requisites; prior knowledge level; any others – please specify) None
  • No. of students to be admitted (with justification if lower than usual cohort size is proposed): As per School Rule
  • Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): Second semester course, Semester long course
  • How does the course link with the vision of AUD?
  • स्‍नातक स्‍तर के दूसरे सेमेस्‍टर के लिए प्रस्‍तावित यह कोर्स पहले सेमेस्‍टर में पढ़ाये गये कोर कोर्स आधुनिक हिंदी कविता (छायावाद तक) की अगली कड़ी है। 1936 ई. में प्रगतिशील लेखक संघ की स्‍थापना के बाद हिंदी कविता में एक नयी प्रवृत्ति का जन्‍म होता है। कुछ ही समय बाद कई परस्‍पर संवादी काव्‍यधारायें जन्‍म लेती हैं। यह पाठ्यक्रम अंबेडकर विश्वविद्यालय के विजन के अनुरूप ही परस्‍पर संवादी प्रवृत्तियों के सहअस्तित्‍व को रेखांकित करता है।
  • How does the course link with the specific programme(s) where it is being offered?
  • पहले सेमेस्‍टर में विद्यार्थी आधुनिक कविता के उद्भव से लेकर छायावाद के दौर की कविताओं का अध्‍ययन कर चुके होंगे। यह पाठ्यक्रम इसी कड़ी में छायावाद के बाद की कविताओं से विद्यार्थियों को अवगत करायेगा। यह कहा जा सकता है कि यह पाठ्यक्रम पहले सेमेस्‍टर के पाठ्यक्रम के आधार पर स्‍वयं को निर्मित करता है।

Course Details:

Summary:

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छायावाद के बाद की हिंदी कविता से विद्यार्थी को परिचित कराना है। 1936 में प्रगतिशील लेखक संघ की स्‍थापना सम्‍मेलन की अध्‍यक्षता करते हुए प्रेमचंद ने सौन्‍दर्यबोध और साहित्‍य की सामाजिक व राजनीतिक भूमिका के संबंध में कुछ महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न उठाये थे। जाहिर है कि उनकी चिंताओं के केन्‍द्र में स्‍वराज की चेतना और सामाजिक व राजनीतिक परिस्थितियां हैं। हर साहित्यिक प्रवृत्ति का जन्‍म अपनी पूर्ववर्ती प्रवृत्ति के साथ संवाद में ही होता है। इसीलिए हिंदी के छायावादी कवियों में आगामी दौर की अनुगूंज सुनाई पड़ने लगती है। प्रगतिवाद के साथ ही उद्बोधनकारी राष्‍ट्रवादी काव्‍यधारा, कालांतर में प्रयोगवादी काव्‍यधारा भी दिखाई पड़ती है। इन सभी साहित्यिक प्रवृत्तियों की अपनी जीवन व समाज-दृष्टि थी। इस पाठ्यक्रम में हम विद्यार्थियों को चुनिंदा कविताओं के जरिये इस दौर की साहित्यिक प्रवृत्तियों और बहसों से सअवगत करायेंगे।

Objectives:

इस पाठ्यक्रम के अध्‍ययन से विद्यार्थी छायावादोत्‍तर हिंदी कविता की प्रवृत्तियों का ज्ञान प्राप्‍त करेंगे। इनमें से प्रगतिवाद, राष्‍ट्रवादी काव्‍यधारा, प्रयोगवाद, नयी कविता आदि प्रमुख हैं। साथ ही इस दौर में पैदा हुई नयी तरह की काव्‍यभाषा के बारे में भी पढ़ेंगे। दरअसल ये सभी साहित्यिक प्रवृत्तियों किन्‍हीं विशिष्‍ट सामाजिक परिस्थितियों में ही उपजी थीं, इन कविताओं के अध्‍ययन के जरिये विद्यार्थी अपने समय और समाज के विश्‍लेषण के लिए आवश्‍यक औजारों का ज्ञान भी प्राप्‍त करेंगे।

Expected learning outcomes:

  • छायावाद के बाद की हिंदी कविता की परंपरा का बोध होगा।
  • अधुनातन कविताओं को समझने की अंतर्दृष्टि मिलेगी।
  • कविता को सामाजिक संदर्भों में पढ़ने या न पढ़ने की बहस का ज्ञान होगा।
  • प्रगतिवाद, प्रयोगवाद व नयी कविता धारा की कविताओं के प्रस्‍थानबिंदु के अंतर को समझ पायेंगे।

Overall structure (course organisation, rationale of organisation; outline of each module):

मॉड्यूल-1

इस मॉड्यूल में केदारनाथ अग्रवाल, नागार्जुन, त्रिलोचन और मुक्तिबोध की कविताओं का अध्‍ययन किया जायेगा। इन सभी कवियों का संबंध प्रगतिशील आंदोलन से है लेकिन इनकी कविताओं में उनका अपना क्षेत्र रचा-बसा हुआ है। केदारजी की कविता केन नदी और बांदा से अपनी जीवनीशक्ति हासिल करती है तो नागार्जुन की कविता मिथिला के अंचल से। त्रिलोचन की कविताओं में अवध का जीवन सांस ले रहा है तो मुक्तिबोध की कविताओं में मालवा के पठार और घाटियां अपने भूगोल के साथ उपस्थित हैं। ये कवि प्रगतिशीलता की विचारधारा को अपने लोक की भूमि पर स्‍थापित करते हैं। मुक्तिबोध की कवितायें 'तार सप्‍तक' में प्रकाशित हुई थीं लेकिन बाद में उनकी कविताओं की संरचना और स्‍वर भिन्‍नतर होता चला गया।

निर्धारित पाठ:

  • केदार नाथ अग्रवाल - बसंती हवा, आज नदी बिलकुल उदास थी, मजदूर का जन्‍म
  • नागार्जुन - उनको प्रणाम, भोजपुर
  • त्रिलोचन - चंपा काले-काले अक्षर नहीं चीन्‍हती, तुलसी बाबा, सॉनेट का पथ
  • गजानन माधव मुक्तिबोध - मुझे कदम-कदम पर, सहर्ष स्‍वीकारा है

मॉड्यूल-2

स्‍वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्‍ट्रवादी चेतना तो लगभग समस्‍त रचनाकारों में मौजूद थी लेकिन उनमें से कुछ ऐसे भी थे जिन्‍होंने राष्‍ट्रवादी चेतना और उद्बोधन की शैली को अपनी कविता की मुख्‍य शैली बना ली। ऐसे कवियों में रामधारी सिंह 'दिनकर' और सोहनलाल द्विवेदी का नाम प्रमुख है। इनमें से विशेषकर दिनकर की कविताओं की सामर्थ्‍य और लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाता जा सकता है कि उन्‍हें राष्‍ट्रकवि के रूप में जाना जाता है। सोहनलाल द्विवेदी सरल और सहज तरीके से राष्‍ट्रप्रेम को व्‍यक्‍त करने वाले कवि हैं। इस मॉड्यूल में दोनों कवियों की निर्धारित कविताओं का अध्‍ययन किया जायेगा।

निर्धारित पाठ:

  • रामधारी सिंह 'दिनकर' - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है, गांधी, समर शेष है
  • माखनलाल चतुर्वेदी - कैदी और कोकिला, यौवन का पागलपन, पुष्‍प की अभिलाषा

माड्यूल- 3

हिंदी कविता के इतिहास में प्रयोगवाद एक महत्‍वपूर्ण काव्‍य प्रवृत्ति के रूप में स्‍थापित है। अज्ञेय न सिर्फ इस काव्‍य प्रवृत्ति के प्रतिनिधि रचनाकार हैं बल्कि वे प्रयोगवाद के सिद्धांतकार भी हैं। व्‍यक्ति और समाज के संबंधों पर व्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के बारे में उनके विचार कविता और आलोचनात्‍मक लेखों में मौजूद हैं। आधुनिक हिंदी कविता के इतिहास में 'तार सप्‍तक' का प्रकाशन एक महत्‍वपूर्ण घटना है। इसके जरिये अज्ञेय ने हिंदी कविता की नयी दिशा को पहचानने और एक हद तक नयी दिशा देने की भी कोशिश की। भवानी प्रसाद मिश्र 'दूसरा सप्‍तक' में प्रकाशित कवि हैं। उनकी कविताओं और जीवन दोनों में गांधी विचार और दर्शन की स्‍पष्‍ट छाप दिखाई पड़ती है। शमशेर बहादुर सिंह की कवितायें ऐंन्द्रियता, सांकेतिकता और चित्रात्‍मकता के लिहाज से विशिष्‍ट हैं। उर्दू और हिंदी में समान गति होने के कारण उन्‍हें हिंदी और उर्दू का दोआब भी कहा जाता है। इस मॉड्यूल में इन तीनों कवियों की निर्धारित कविताओं का अध्‍ययन किया जायेगा।

निर्धारित पाठ :

  • सच्चिदानंद हीरानंद वात्‍स्‍यायन 'अज्ञेय'- कलगी बाजरे की, हरी घास पर क्षण भर
  • भवानी प्रसाद मिश्र- सतपुड़ा के जंगल, चार कौए उर्फ चार हौए
  • शमशेर बहादुर सिंह - निराला के प्रति, तड़पती हुई से ग़ज़ल कोई लाये

मॉड्यूल-4

सप्‍तकों के प्रकाशन को एक समान विश्‍व-दृष्टि रखने वाले कवियों के मंच के रूप में नहीं देखा जा सकता। फिर इनमें प्रकाशित अधिकांश कवि युवा थे और कालांतर में उनकी कविताओं के स्‍वर में बहुत बदलाव भी हुए। इस मॉड्यूल में गिरिजा कुमार माथुर, रघुवीर सहाय, धूमिल और सर्वेश्‍वर दयाल सक्‍सेना की कविताओं का अध्‍ययन किया जायेगा।

निर्धारित पाठ :

  • रघुवीर सहाय - रामदास, हंसो-हंसो जल्‍दी हंसो, राष्‍ट्रगीत
  • धूमिल - भाषा की रात
  • सर्वेश्‍वर दयाल सक्‍सेना - देश कागज पर बना नक्‍शा नहीं होता, लीक पर वे चलें
  • गिरिजा कुमार माथुर - पंद्रह अगस्‍त, नया कवि

संदर्भ पाठ/ पुस्तकें

  • प्रतिनिधि कवितायें - नागार्जुन, राजकमल प्रकाशन, दिल्‍ली
  • प्रतिनिधि कवितायें - केदारनाथ अग्रवाल, राजकमल प्रकाशन, दिल्‍ली
  • प्रतिनिधि कवितायें- त्रिलोचन, राजकमल प्रकाशन, दिल्‍ली
  •  http://kavitakosh.org/
  • http://www.hindisamay.com/
  • तारसप्तक- अज्ञेय (संपादक), भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली
  • प्रतिनिधि कवितायें- मुक्तिबोध, राजकमल प्रकाशन, दिल्‍ली
  • प्रतिनिधि कवितायें- शमशेर, राजकमल प्रकाशन, दिल्‍ली
  • आधुनिक साहित्‍य की प्रवृत्तियां, नामवर सिंह, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद
  • 1प्रतिनिधि कवितायें- शमशेर बहादुर सिंह, राजकमल प्रकाशन, दिल्‍ली
  •  रघुवीर सहाय, पंकज चतुर्वेदी, साहित्‍य अकादमी, दिल्‍ली
  • संसद से सड़क तक, धूमिल, रामजकल प्रकाशन, दिल्‍ली
  • प्रतिनिधि कवितायें- सर्वेश्‍वर दयाल सक्‍सेना, राजकमल प्रकाशन, दिल्‍ली

Contents (week wise plan with readings):

Week

Plan/ Theme/ Topic

Objectives

Core Reading (with no. of pages)

Additional Suggested Readings

Assessment (weights, modes, scheduling)

1

छायावादोत्‍तर काव्‍य का सामान्‍य परिचय

छायावादोत्‍तर कविता की पृष्‍ठभूमि से परिचय

आधुनिक साहित्‍य की प्रवृत्तियां

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2

केदारनाथ अग्रवाल

कविताओं का अध्‍ययन

बसंती हवा, आज नदी बिलकुल उदास थी, मजदूर का जन्‍म

--------

 

3

नागार्जुन

कविताओं का अध्‍ययन

उनको प्रणाम, भोजपुर

-----------

 

4

त्रिलोचन

कविताओं का अध्‍यन

चंपा काले-काले अक्षर नहीं चीन्‍हती, तुलसी बाबा, सॉनेट का पथ  

 

20% गृहकार्य

5

गजानन माधव मुक्तिबोध

कविताओं का अध्‍ययन

मुझे कदम-कदम पर, सहर्ष स्‍वीकारा है

 

 

6

रामधारी सिंह दिनकर

कविताओं का अध्‍ययन

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है, गांधी, समर शेष है

-------------

 

7

माखनलाल चतुर्वेदी

कविताओं का अध्‍ययन

कैदी और कोकिला, यौवन का पागलपन

-----------

 

8

सच्चिदानंद हीरानंद वात्‍स्‍यायन 'अज्ञेय'

कविताओं का अध्‍ययन

कलगी बाजरे की, हरी घास पर क्षण भर

-------------

--20%कक्षा प्रस्‍तुति

9

भवानी प्रसाद मिश्र

कविताओं का अध्‍ययन

सतपुड़ा के जंगल, चार कौए उर्फ चार हौए

 

 

10

शमशेर बहादुर सिंह

कविताओं का अध्‍ययन

निराला के प्रति, तड़पती हुई सी ग़ज़ल कोई लाये

 

 

11

रघुवीर सहाय

कविताओं का अध्‍ययन

रामदास, हंसो-हंसो जल्‍दी हंसो, राष्‍ट्रगीत

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20%कक्षा परीक्षा

12

गिरिजाकुमार माथुर

कविताओं का अध्‍ययन

पंद्रह अगस्‍त, नया कवि

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13

धूमिल

कविताओं का अध्‍ययन

भाषा की रात

 

 

14

सर्वेश्‍वर दयाल सक्‍सेना

कविताओं का अध्‍ययन

देश कागज पर बना नक्‍शा नहीं होता, लीक पर वे चलें

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40%सत्रांत परीक्षा

Pedagogy:

  • Instructional strategies: क्लासरूम अध्यापन, विशिष्ट व्याख्यान और फिल्म/डाक्यूमेंटरी माध्यम का प्रयोग
  • Special needs (facilities, requirements in terms of software, studio, lab, clinic, library, classroom/others instructional space; any other – please specify): None
  • Expertise in AUD faculty or outside AUD faculty
  • Linkages with external agencies (e.g., with field-based organizations, hospital; any others) None