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आधुनिक हिंदी कविता [छायावाद तक]

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Course TypeCourse CodeNo. Of Credits
Foundation CoreNA6
  • Does the course connect to, build on or overlap with any other courses offered in AUD? None
  • Specific requirements on the part of students who can be admitted to this course: (Pre- requisites; prior knowledge level; any others – please specify) None
  • No. of students to be admitted (with justification if lower than usual cohort size is proposed): As per School Rule
  • Course scheduling (semester; semester-long/half-semester course; workshop mode; seminar mode; any other – please specify): 1st Semester
  • How does the course link with the vision of AUD?
  • स्नातक स्तर के विद्यार्थियों के लिए प्रस्तावित यह पाठ्यक्रम हिंदी की आधुनिक कविता के एक हिस्से [1850 से 1936] पर आधारित है। इन कविताओं के अध्ययन से विद्यार्थी अपनी उस सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को समझ सकेगा जिससे हमारी आधुनिक संस्कृति का जन्म हुआ। बराबरी, न्याय और स्वतंत्रता पर आधारित इस काव्य संस्कृति का अध्ययन अम्बेडकर विश्वविद्यालय की दृष्टि के अनुरूप है।
  • How does the course link with the specific programme(s) where it is being offered?
  • स्नातक हिंदी [आनर्स] के विद्यार्थी के लिए अपनी काव्य काव्य परंपरा का ज्ञान और समझ आवश्यक है। यह पाठ्यक्रम उसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए हिंदी कविता के कई पाठ्यक्रमों में से एक है। हिंदी काव्य परंपरा का अध्ययन आधुनिक काल से इसलिए शुरू किया गया है ताकि विद्यार्थी अपनी जानी-पहचानी खड़ी बोली के काव्य से पहले परिचित हों।

Course Details:

Summary:

हिंदी की विशाल काव्य-राशि बनती-बदलती रही है परंतु आधुनिकता के आगमन, खड़ी बोली के साहित्यिक भाषा के रूप में विकसित होने, और राष्ट्र की अवधारणा के साथ उसकी संगतता विद्वानों के अनुसार लगभग 1850 से मानी जा सकती है। भारतेंदु हरिश्चंद की अगुवाई में पहली बार खड़ी बोली को नयी विधाओं और स्वरों में ढाला गया। यह पुरानी ब्रज काव्य-भाषा और परंपरा से खड़ी बोली में संक्रमण था। ब्रज काव्य-परंपरा की रीति बंधी प्रणाली और वैचारिकी से कविता बाहर आयी क्योंकि ब्रज अब नए जमाने के प्रश्नों और चुनौतियों का वहन करने में सक्षम न थी। यह पाठ्यक्रम खड़ी बोली के उसी आरम्भिक दौर की कविताओं से शुरू होकर राष्ट्र-निर्माण के विभिन्न प्रश्नों से जूझती कविताओं को अपने में सम्मिलित करता है। साथ ही यह पाठ्यक्रम छायावाद [1918-36] की कविताओं का अध्ययन भी करता है जिसके सहारे विद्यार्थी उस दौर की कविता में वैयक्तिकता के उभार, प्रकृति-प्रेम, सांस्कृतिक जागरण, स्वच्छंदता व कल्पना आदि मूल्यों की समझ विकसित कर सकेंगे।

Objectives:

इस पाठ्यक्रम के अध्ययन से विद्यार्थी अपनी साहित्यिक काव्य परंपरा का बोध विकसित कर सकेंगे। खड़ी बोली के काव्यभाषा के रूप में विकसित होने की प्रक्रिया समझ सकेंगे। वे राष्ट्रीय व सांस्कृतिक जागरण की काव्यात्मक अभिव्यक्तियों से परिचय हासिल कर सकेंगे। साथ ही वे हिंदी की आधुनिक कविता को रूपाकार देने वाले छायावादी कवियों की कविताओं के अध्ययन के सहारे तत्कालीन समय-समाज में व्याप्त वैचारिक आलोड़नों का विश्लेषण करने में भी सक्षम हो सकेंगे।

Expected learning outcomes:

  • विद्यार्थी खड़ी बोली के काव्य-भाषा बन जाने की प्रक्रिया समझ सकेंगे।
  • कविता पढ़ने-समझने, विश्लेषित करने व उसके रसास्वादन का ढब विकसित कर सकेंगे।
  • राष्ट्रीय व सांस्कृतिक जागरण की विभिन्न काव्यात्मक अभिव्यक्तियों को विश्लेषित कर सकेंगे।
  • इतिवृत्तात्मकता से आगे बढ़ते हुए कविता के परवर्ती संघनित रूपों का विश्लेषण कर सकेंगे।

Overall structure (course organisation, rationale of organisation; outline of each module):

माड्यूल-1

भारतेंदु युग की कविताएँ

हिंदी कविता के इतिहास में भारतेंदु युग (1850-1900) पुरानी ब्रज भाषा कविता से खड़ी बोली काव्य में संक्रमण के लिए जाना जाता है। अन्य आधुनिक विधाओं की तरह कविता में भी भारतेंदु इस संक्रमण भूमि पर खड़े हैं और आधुनिकता की तरह बढ़ते दीखते हैं। वे ब्रजभाषा, उर्दू और खड़ी बोली, तीनों में कविता करते हैं पर उनका झुकाव खड़ी बोली की तरफ ही है। इसी दौर में ब्रज भाषा कविता के दरबारीपने, रूढ़ियों और बंधी-बँधाई चाल से निकलकर हिंदी कविता 'नयी चाल में ढली'। राष्ट्रीयता की भावना भी इस युग की कविताओं में दीखने लगती है। इस माड्यूल में विद्यार्थी उस दौर के दो प्रतिनिधि कवियों भारतेंदु और हरिऔध की कविताओं के सहारे उस दौर में नए विकसित हो रहे नए सांस्कृतिक स्वरूपों के साथ संगत नयी तरह की हिंदी कविता का अध्ययन कर सकेंगे।

पाठ:

भारतेंदु: 'चुनिंदा दोहे', 'नए जमाने की मुकरी', 'हरी हुई भूमि सब' और 'दुनिया में हाथ पैर हिलाना नहीं अच्छा' शीर्षक कविताएँ

हरिऔध: 'सुधार की बातें', 'हम और तुम', 'कर्मवीर', 'सुशिक्षा-सोपान' शीर्षक कविताएँ

माड्यूल-2

द्विवेदी युग की कविताएँ

द्विवेदी युग (1900-1918) तक आते-आते हिंदी कविता अपने समय की सामाजिक-सांस्कृतिक सच्चाइयों को और अधिक बल के साथ अभिव्यक्ति देने लगती है। मिथकों की पुनर्व्याख्या के साथ ही सामान्य जन जीवन के कष्ट भी कविता के विषय बनने शुरू होते हैं। राष्ट्रीयता के उभार के साथ ही भारतीयता को पहचानने-व्याख्यायिय करने की चुनौती उस दौर की कविताओं में दिखने लगती है। मिथकों की पुनर्व्याख्या के सहारे एक ओर उस दौर के कवि-बुद्धिजीवी तत्कालीन बर्तानवी हुकूमत के सांस्कृतिक दबदबे को चुनौती दे रहे थे वहीं दूसरी ओर भारतीय समाज और संस्कृति के तमाम पिछड़े हुए पहलुओं में सुधार कार्य का बीड़ा भी वे अपनी कविताओं के कंधे पर उठाए हुए थे। इस माड्यूल में विद्यार्थी द्विवेदी युग के दो प्रमुख कवियों, मैथिलीशरण गुप्त और रामनरेश त्रिपाठी की कविताओं के जरिये उपरोक्त आलोड़नों से परिचित होंगे।

पाठ:

मैथिलीशरण गुप्त: 'साकेत अष्टम सर्ग से चुनिंदा अंश', 'किसान' और 'विराट वीणा' शीर्षक कविताएँ

रामनरेश त्रिपाठी: 'ज्ञान का दंड', 'हैट के गुण', 'कामना', 'अतुलनीय जिसके प्रताप का' शीर्षक कविताएँ

माड्यूल- 3

छायावाद

हिंदी कविता के इतिहास में 1918 से 1936 तक के समय को छायावाद संज्ञा से अभिहित किया जाता है। हिंदी आधुनिक कविता इस काल में अपनी पूर्ववर्ती कविता से सीखते हुए व्यवस्थित होती है। इस व्यवस्था में भाषा की व्यवस्था के साथ भावों की व्यवस्था भी शामिल है। इस दौर के कवियों पर स्वच्छंदतावाद, रहस्यवाद व बांग्ला कविता का गहरा असर आलोचकों ने चिन्हित किया है। राष्ट्रीय सांस्कृतिक जागरण की चली आ रही काव्य-परंपरा इस दौर में आगे बढ़ती ही है, साथ ही प्रकृति के साथ इस दौर के कवि नए तरह का सम्बंध विकसित करते हैं। इस दौर की कविता में 'व्यक्ति' की प्रधानता भी देखी जा सकती है जिसे निराला 'मैंने मैं शैली अपनाई' जैसी कविताओं के सहारे अभिव्यक्त करते हैं। कल्पना प्रवणता इस दौर की कविता का एक और विशिष्ट गुण है। द्विवेदीयुगीन इतिवृत्तात्मकता से पीछा छुड़ाते हुए इस दौर की कविताएँ 'स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह' भी कही जाती हैं। नए सिरे से स्त्री-छवि और प्रेम का निर्माण भी इस दौर की कविताओं की प्रमुख प्रवृत्ति है। जयशंकर प्रसाद व अन्य कवियों ने इस दौर की कविता में दार्शनिकता के नए आयाम दिए। इस माड्यूल के दो खंड होंगे। पहले माड्यूल में विद्यार्थी जयशंकर प्रसाद और सुमित्रानंदन पंत की कविताओं का अध्यायन करेंगे और दूसरे माड्यूल में वे सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' व महादेवी वर्मा की कविताएँ पढ़ेंगे।

यह माड्यूल निम्नांकित दो खंडों में विभक्त होगा:

पाठ: क

प्रसाद: 'आँसू से चुनिंदा छंद', 'ले चल वहाँ भुलावा देकर', 'बीती विभावरी जाग री', 'अरूण यह मधुमय देश हमारा' व 'आह! वेदना मिली विदाई' शीर्षक कविताएँ

पंत: 'प्रथम रश्मि', 'ताज', 'भारत माता ग्रामवासिनी' और 'छोड़ द्रुमों की मृदु छाया' शीर्षक कविताएँ

पाठ: ख

निराला: 'बादल राग-6', 'संध्या सुंदरी', 'मौन', 'गहन है यह अंध कारा', 'बांधो न नाव इस ठाँव बंधु', 'स्नेह निर्झर बह गया है' और 'राजे ने अपनी रखवाली की' शीर्षक कविताएँ

महादेवी: 'सब बुझे दीपक जला लूँ', 'पंथ होने दो अपरिचित', 'मैं बनी मधुमास आली' और 'मधुर मधुर मेरे दीपक जल' शीर्षक कविताएँ

सहायक सामग्री:

  • भारतेंदु प्रतिनिधि रचनाएँ, कृष्णदत्त पालीवाल, सचिन प्रकाशन, दिल्ली, 1987
  • https://hindisamay.com/hariodh%20Samagra/Hari%20odh%20samagr%20Index.htm
  • साकेत, मैथिलीशरण गुप्त, साहित्य सदन, झाँसी, 2014
  • मैथिलीशरण गुप्त संचयिता, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली, 2002
  • https://sites.google.com/site/kavitahindikavita/ramnaresh-tripathi-kavita-poem
  • प्रतिनिधि कविताएँ, जयशंकर प्रसाद, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली, 2015
  • स्वच्छंद, सम्पादक अशोक वाजपेयी, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली, 2000
  • राग-विराग, सम्पादक रामविलास शर्मा, लोकभारती प्रकाशन, प्रयागराज, 2008
  • महादेवी, प्रतिनिधि कविताएँ, भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली, 1983

Contents (week wise plan with readings):

Week

Plan/ Theme/ Topic

Objectives

Core Reading (with no. of pages)

Additional Suggested Readings

Assessment (weights, modes, scheduling)

1

भारतेंदु

आधुनिक हिंदी कविता के निर्माण की समझ विकसित करना व भारतेंदु की कविताओं का विश्लेषण

'चुनिंदा दोहे', 'नए जमाने की मुकरी',  'हरी हुई भूमि सब' और 'दुनिया में हाथ पैर हिलाना नहीं अच्छा' शीर्षक कविताएँ

 

 

2

हरिऔध

कविताओं के विश्लेषण के सहारे सुधार आंदोलन के असर की समझ बनाना

'सुधार की बातें', 'हम और तुम', 'कर्मवीर', 'सुशिक्षा-सोपान' शीर्षक कविताएँ

 

20 %, गृहकार्य

3

मैथिलीशरण गुप्त

कविता में मिथकों की व्याख्या की आवश्यकता और उनके प्रभाव को विश्लेषित करना

'साकेत अष्टम सर्ग' से चुनिंदा अंश

 

 

4

मैथिलीशरण गुप्त

तत्कालीन सामाजिक समस्याओं का कविता पर असर दिखाना

'किसान' और 'विराट वीणा' शीर्षक कविताएँ

 

 

5

रामनरेश त्रिपाठी

राष्ट्रीयता व तत्कालीन कविता के सम्बंध की समझ विकसित करना

'ज्ञान का दंड', 'हैट के गुण', 'कामना',  'अतुलनीय जिसके प्रताप का' शीर्षक कविताएँ

 

20% कक्षा प्रस्तुति

6

प्रसाद

प्रेम के प्रति आधुनिक दृष्टिकोण से परिचित कराना

'आँसू' से चुनिंदा छंद

 

 

7

प्रसाद

कविताओं की व्याख्या के सहारे रहस्यवाद की व्याख्या व कविता में राष्ट्र की अवधारणा समझाना

'ले चल वहाँ भुलावा देकर', 'बीती विभावरी जाग री', 'अरूण यह मधुमय देश हमारा' शीर्षक कविताएँ

 

 

8

पंत

प्रकृति को नयी नजर से देखने की छायावादी दृष्टि से परिचय

'प्रथम रश्मि',  'ताज', 'भारत माता ग्रामवासिनी' और 'छोड़ द्रुमों की मृदु छाया' शीर्षक कविताएँ

 

20% कक्षा-परीक्षा

9

निराला

निराला के काव्य-संसार की विविधता दिखाते हुए सामाजिक व व्यक्तिगत के काव्यात्मक रूपांतरण की प्रक्रिया का विश्लेषण

'बादल राग-6', 'संध्या सुंदरी', 'मौन', 'गहन है यह अंध कारा' शीर्षक कविताएँ

 

 

10

निराला

निराला के काव्य-संसार की विविधता दिखाते हुए सामाजिक व व्यक्तिगत के काव्यात्मक रूपांतरण की प्रक्रिया का विश्लेषण

'बांधो न नाव इस ठाँव बंधु', 'स्नेह निर्झर बह गया है' और 'राजे ने अपनी रखवाली की' शीर्षक कविताएँ

 

 

11

महादेवी

छायावादी कविता में स्त्री स्वर का विश्लेषण

'सब बुझे दीपक जला लूँ', 'पंथ होने दो अपरिचित' शीर्षक कविताएँ

 

 

12

महादेवी

छायावादी कविता में स्त्री स्वर का विश्लेषण

'मैं बनी मधुमास आली' और 'मधुर मधुर मेरे दीपक जल' शीर्षक कविताएँ

 

40% सत्रांत परीक्षा

Pedagogy:

  • Instructional strategies: कक्षा अध्यापन, विशिष्ट व्याख्यान और फिल्म/डाक्यूमेंटरी आदि ई-संसाधनों का प्रयोग
  • Special needs (facilities, requirements in terms of software, studio, lab, clinic, library, classroom/others instructional space; any other – please specify): None
  • Expertise in AUD faculty or outside AUD faculty
  • Linkages with external agencies (e.g., with field-based organizations, hospital; any others) None